Adv. Dilip Kumar

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दान और उससे संबंधित कानून।

भारत में संपत्ति के वैध अंतरण के कुल पाँच तरीके है, जिसे कानून की भाषा में दान, पट्टा, विनिमय, विक्रय और बंधक के नाम से पुकारा जाता है दान को छोड़कर शेष चारों तरीके में प्रतिफल के बदले दूसरी संपत्ति में का हित अंतरित किया जाता है। दान उपरोक्त चारों तरीके से पूर्णतः भिन्न है। दान क्या है? वैसी चल या अचल संपत्ति जो विद्यमान हो, यानि जो वर्तमान में अस्तित्व में हो, उसका स्वेच्छया से और बिना किसी प्रतिफल के दान देनेवाला, दान लेनेवाला को अंतरित करता है,साथ-साथ जसके पक्ष में ऐसा अंतरण किया गया  है उसके  द्वारा या उसकी ओर से उस अंतरण को स्वीकार किया गया है, दान कहलाता है। दान देने वाला दाता और लेने वाला आदाता कहलाता है। (U/S 122 of the Transfer of the property...

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न्यायिक निर्णयों में “डिस्प्यूट-ईटर” भी जगह बना रहा है।

"डिस्प्यूट-ईटर" की स्थापना के लगभग साढ़े तीन वर्ष पूरे हो चुके हैं। उक्त अवधि में यह संस्था 48 विवादों को "पूर्ण -विराम" तक पहुँचाने में सफल रही है। शुरूआती दौर...

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जानिए क्या है न्याय के पूर्ण विराम का सिद्धांत!

जो वाद जिस किसी भी न्यायालय में लंबित है उसे उसी न्यायालय में समाप्त करने का प्रयास “अर्थात न्याय के पूर्ण विराम का सिद्धांत (The full stop theory of justice)”...

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पचास लाख दो और डिवोर्स लो।

प्रश्न:- मेरे पति द्वारा विवाह-विच्छेद का एक वाद परिवार न्यायालय में लाया गया था। मैं विवाह-विच्छेद नहीं चाहती थी, परंतु न्यायालय द्वारा विवाह विच्छेद कि डिक्री प्रदान कर दिया गया।...

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